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हर्बल गुलाल से रंगीली होगी होली, कबीरधाम की महिलाओं ने खोले आत्मनिर्भरता के नए रास्ते

बिहान मिशन से जुड़ी महिला समूहों द्वारा निर्मित प्राकृतिक गुलाल बाजार में उपलब्ध, 50–60 हजार तक का हो रहा लाभ

हर्बल गुलाल से रंगीली होगी होली, कबीरधाम की महिलाओं ने खोले आत्मनिर्भरता के नए रास्ते

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बिहान मिशन से जुड़ी महिला समूहों द्वारा निर्मित प्राकृतिक गुलाल बाजार में उपलब्ध, 50–60 हजार तक का हो रहा लाभ

📍 कवर्धा | 24 फरवरी 2026

छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान से जुड़ी कबीरधाम जिले की महिला स्व-सहायता समूह की महिलाएं आत्मनिर्भरता की दिशा में लगातार आगे बढ़ रही हैं। जनपद पंचायत बोडला के ग्राम राजानवागांव की जय गंगा मैया स्व-सहायता समूह की दीदियों ने इस वर्ष रंगोत्सव होली के अवसर पर हर्बल गुलाल का निर्माण किया है।

महिला समूह द्वारा तैयार किया गया यह हर्बल गुलाल लाल, गुलाबी, पीले सहित विभिन्न आकर्षक रंगों में उपलब्ध है। प्राकृतिक खुशबू और आकर्षक पैकेजिंग के साथ यह गुलाल बाजार में बिक्री के लिए तैयार है। इस गतिविधि में 10 महिलाओं की प्रत्यक्ष भागीदारी है, जो उनके लिए आय का सशक्त स्रोत बन रहा है।

🗣 क्या बोले अधिकारी

इस संबंध में चर्चा करते हुए कबीरधाम कलेक्टर गोपाल वर्मा ने बताया कि प्रत्येक वर्ष होली के अवसर पर जिले के विभिन्न महिला समूहों द्वारा हर्बल गुलाल का निर्माण किया जाता है। कलेक्टोरेट एवं सभी जनपद पंचायत कार्यालयों में स्टॉल लगाकर इसकी बिक्री की जाती है। उन्होंने कहा कि समूह की दीदियों द्वारा बनाया गया गुलाल पूरी तरह प्राकृतिक है और बाजार के अन्य रंगों की तुलना में सस्ता एवं सुरक्षित है।

वहीं सीईओ जिला पंचायत अभिषेक अग्रवाल ने बताया कि इस व्यवसाय से प्रत्येक समूह को लगभग 50 से 60 हजार रुपये तक का लाभ होता है। मैदानी कर्मचारियों द्वारा समूहों को मौसमी व्यवसाय हेतु प्रेरित किया जाता है तथा कच्चे माल की उपलब्धता में भी सहयोग प्रदान किया जाता है।

🌿 हर्बल गुलाल के प्रमुख फायदे

✔ प्राकृतिक रंग – बिना मिलावट, पूरी तरह प्राकृतिक सामग्री से निर्मित।

✔ पर्यावरण अनुकूल – आसानी से धुलने योग्य, पानी की बचत।

✔ त्वचा के लिए सुरक्षित – किसी भी हानिकारक रसायन से मुक्त।

✔ एलर्जी रहित – प्राकृतिक सामग्री से तैयार, त्वचा पर सुरक्षित।

✔ प्राकृतिक खुशबू – फूल-पत्तियों से बनी सुगंध, केमिकल मुक्त।

🎨 निष्कर्ष

कबीरधाम की महिला स्व-सहायता समूह न केवल पर्यावरण सुरक्षित होली का संदेश दे रही हैं, बल्कि हर्बल गुलाल निर्माण के माध्यम से आत्मनिर्भरता की मिसाल भी पेश कर रही हैं। बीते वर्षों की तरह इस वर्ष भी क्षेत्रवासियों में इन प्राकृतिक रंगों को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है।

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