कबीरधामKawardhaनौकरी

मशरूम उत्पादन से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ती कबीरधाम जिले की महिलाएं- पूर्व जिला पंचायत सदस्य श्रीमती रश्मि विजय शर्मा

कृषि विज्ञान केन्द्र में मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण सह प्रमाण पत्र वितरण कार्यक्रम का आयोजन

मशरूम उत्पादन से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ती कबीरधाम जिले की महिलाएं- पूर्व जिला पंचायत सदस्य श्रीमती रश्मि विजय शर्मा

 

कृषि विज्ञान केन्द्र में मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण सह प्रमाण पत्र वितरण कार्यक्रम का आयोजन

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फलो एवं सब्जियों के आचार बनाने की विधि पर प्रकाशित पाम्पलेट का किया गया विमोचन

 

कवर्धा 06 अगस्त 2025। कृषि विज्ञान केन्द्र, कवर्धा में 06 अगस्त 2025 को मशरूम उत्पादन विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित किया गया एवं प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण पत्र वितरित किया गया। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व जिला पंचायत सदस्य श्रीमती रश्मि विजय शर्मा शामिल हुए। कृषि विज्ञान केन्द्र, कवर्धा द्वारा कौशल भारत एवं ग्रामीण युवाओं के लिए कौशल प्रशिक्षण अंतर्गत जिले के 106 महिला प्रतिभागियों को मशरूम उत्पादन एवं माली प्रशिक्षण प्रदाय किया गया। सफल प्रशिक्षणार्थियों को पूर्व जिला पंचायत सदस्य श्रीमती रश्मि विजय शर्मा के द्वारा प्रमाण पत्र का वितरण किया गया तथा कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा फलो एवं सब्जियों के आचार बनाने की विधि पर प्रकाशित पाम्पलेट कर विमोचन किया गया। कृषि विज्ञान केन्द्र, कवर्धा के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख, डॉ. बी.पी. त्रिपाठी ने कृषि विज्ञान केन्द्र की गतिविधियों की जानकारी दी। इस अवसर पर श्रीमती सविता ठाकुर, श्रीमती निशा साहु,कृषि विज्ञान केन्द्र, कवर्धा के वैज्ञानिक इंजी. टी. एस. सोनवानी, डॉ. बी. एस. परिहार एवं डॉ. एन.सी. बंजारा एवं अन्य अधिकारी, कर्मचारी जनप्रतिनिधि, ग्रामीण उपस्थित थे।

पूर्व जिला पंचायत सदस्य श्रीमती रश्मि विजय शर्मा ने प्रशिक्षणार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि महिलाएं कृषि में पुरूषों के बराबर भागीदार बन रहे है। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा महिला सशक्तिकरण के लिए अनेक योजनाएं संचालित कि जा रही है। उन्होंने महिलाओं से योजनाओं का अधिकाधिक लाभ लेकर आर्थिक एवं सामाजिक रूप से सशक्त बनने का अनुरोध किया गया तथा सभी प्रशिक्षणार्थियों को शुभकामनाएं दी। उन्होंने बताया कि मशरूम प्रोटीन का एक अच्छा स्त्रोत है। इसमें 20-35 प्रतिशत प्रोटीन की मात्रा विद्यमान रहती है। इसमें विटामीन सी, विटामीन डी, पोटेशियम, फास्फोरस, सोडियम तथा सूक्ष्म मात्रा में लोहा भी पाया जाता है। जो मानसिक तनाव से ग्रसित मरीजों के लिए फायदेमंद होता है। इसमें वसा, स्टार्च, कोलेस्ट्राल की मात्रा कम होती है। प्रशिक्षणार्थियों को मशरूम उत्पादन के सैद्धांतिक एवं प्रायोगिक जानकारी प्रदाय किया गया।

मशरूम उत्पादन के लिए लगने वाले

आवश्यक सामाग्री

प्रशिक्षण में बताया गया कि मशरूम उत्पादन के लिए पैराकुट्टी, गेहूॅ भूसा, धान भूसा, पॉलीथीन की थैलियॉ, नॉयलोन रस्सी, मशरूम बीज, प्लास्टिक ड्रम, बांस की टोकरी, गर्मपानी, बावस्टिन एवं फार्मोलिन की जानकारी दी गई। कृषकों को मशरूम उत्पादन के विस्तृत विधि में भूसे के उपचार, बीजाई, फसल प्रबंधन, तोड़ाई आदि के बारे में जानकारी दी गई। प्रशिक्षणार्थियों को बाताया गया कि मशरूम की पहली फसल बीजाई के 15-20 दिन प्राप्त होने लगता है तथा 1 बैग से 2-3 बार फसल ले सकते है। मशरूम उत्पादन कर किसान अपने फसल अवशेषों का उपयोग कर सकते हैं तथा अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं। 1 किलोग्राम मशरूम उत्पादन में लगभग 15-20 रूपये लागत आती है। जिसे आसानी से बाजार में 100-150 रूपये प्रति किलोग्राम की दर से बेच सकते है।

 

मशरूम उत्पादन में आने वाले परेशानी का समाधान

 

 

मशरूम उत्पादन में अन्य फफूंदो का संक्रमण एवं चूहों से बचाव के उपायों की जानकारी दी गई। माली प्रशिक्षण अंतर्गत प्रशिक्षणार्थियों को बगीचो के स्थापना एवं रख-रखाव के संबंध में विस्तार से सैद्धांतिक एवं प्रायोगिक प्रशिक्षण प्रदाय किया गया। प्रशिक्षण के दौरान सजावटी पौधें, फलदार एवं फुलदार पौधें तैयार करने की विभिन्न विधियों जैसे बीज, कलम, लेयरिंग, बडिंग, कटिंग विधियों द्वारा पौधे तैयार करना सिखाया गया। साथ ही पौधे की सधाई एवं कटाई का प्रायोगिक प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षणार्थियों को बगीचे मे उपयोग होने वाले उपयोगी कृषि यंत्रों के संचालन एवं रख-रखाव की जानकारी दी गई।

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