सरस मेला में 2 दिनों में 1.85 लाख से अधिक का कारोबार, महिला समूहों को मिल रहा बड़ा मंच
कवर्धा | 25 मार्च 2026

सरदार पटेल मैदान कवर्धा में 23 से 26 मार्च तक आयोजित संभागीय सरस मेला महिला स्व-सहायता समूहों के लिए बड़ी सफलता साबित हो रहा है। मेले के महज दो दिनों में ही विभिन्न समूहों द्वारा 1 लाख 85 हजार रुपए से अधिक का व्यवसाय किया जा चुका है।
मेले में महिला समूहों द्वारा तैयार किए गए उत्पाद लोगों को काफी पसंद आ रहे हैं। खासतौर पर जैविक खाद्य सामग्री जैसे दाल, अचार, पापड़, मिलेट बिस्किट, साथ ही हर्बल फिनायल, साबुन, दोना-पत्तल, अगरबत्ती, हैंडलूम उत्पाद, चूड़ी-कंगन आदि आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
स्टॉल में उपलब्ध ये सामग्री बाजार से कम कीमत पर मिलने के कारण लोगों द्वारा हाथों-हाथ खरीदी जा रही है। बड़ी संख्या में लोग मेले में पहुंचकर ग्रामीण महिलाओं द्वारा बनाए गए उत्पादों का लाभ उठा रहे हैं।
28 स्टॉल लगे, सभी जिलों की भागीदारी
जिला पंचायत कबीरधाम के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक अग्रवाल ने बताया कि इस संभागीय मेले में दुर्ग संभाग के सभी 7 जिलों के महिला समूहों ने अपने उत्पादों की प्रदर्शनी और बिक्री के लिए स्टॉल लगाए हैं। फूड स्टॉल के अलावा कुल 28 अन्य स्टॉल लगाए गए हैं।
उन्होंने बताया कि बेहतर बिक्री से महिला समूहों का उत्साह बढ़ा है और यह मेला उन्हें अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए एक बड़ा मंच प्रदान कर रहा है। इससे महिलाओं के स्वरोजगार को बढ़ावा मिलेगा और वे आत्मनिर्भर बनेंगी।
मनोरंजन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बढ़ाई रौनक

मेले में खरीदारी के साथ-साथ मनोरंजन के भी खास इंतजाम किए गए हैं। पॉपकॉर्न, चाट, गुपचुप और फलों के स्टॉल के साथ बच्चों के लिए ट्रम्पोलिन भी आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
सांस्कृतिक संध्या में कलाकारों ने शानदार प्रस्तुतियां दीं—
महेश ठाकुर और सरगम ग्रुप ने देशभक्ति और फिल्मी गीतों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया
माधवेश केसरी एवं टीम ने रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किया
कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय के बच्चों ने छत्तीसगढ़ी नृत्य से सभी का मन मोह लिया
धनीदास मानिकपुरी और संजय मानिकपुरी ने पारंपरिक लोकगीतों की प्रस्तुति दी
रामखिलावन लांझेकर एवं साथियों ने सूफी गायन से माहौल को सुरमय बना दिया
महिलाओं के लिए बन रहा आत्मनिर्भरता का माध्यम
संभागीय सरस मेला न केवल ग्रामीण महिलाओं के उत्पादों को बाजार उपलब्ध करा रहा है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर भी दे रहा है। बढ़ती बिक्री और लोगों की सकारात्मक प्रतिक्रिया से महिला समूहों का उत्साह लगातार बढ़ रहा है।





