कबीरधाम बना नंबर-1: मनरेगा में रोजगार देने में प्रदेश में अव्वल

सर्वाधिक मानव दिवस, परिवारों और दिव्यांगजनों को रोजगार देने में जिला पहले स्थान पर
कवर्धा | 01 अप्रैल 2026
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत कबीरधाम जिले ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रदेश में प्रथम स्थान हासिल किया है। जिले ने सर्वाधिक मानव दिवस सृजन, सर्वाधिक परिवारों को रोजगार और दिव्यांगजनों को रोजगार देने जैसे कई महत्वपूर्ण मापदंडों में शीर्ष स्थान प्राप्त किया है।
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा के मार्गदर्शन और निरंतर समीक्षा के चलते जिले ने यह उपलब्धि हासिल की है। ग्रामीणों को अधिक से अधिक रोजगार उपलब्ध कराने और योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया गया।

मुख्य उपलब्धियां:
सर्वाधिक मानव दिवस रोजगार:
जिले में 58,54,040 मानव दिवस का रोजगार सृजित किया गया, जो प्रदेश में सबसे अधिक है।
सर्वाधिक परिवारों को रोजगार:
1,42,482 ग्रामीण परिवारों को रोजगार मिला, जिससे जिला पहले स्थान पर रहा।
दिव्यांगजनों को रोजगार:
2,538 दिव्यांगजनों को 58,493 मानव दिवस का रोजगार प्रदान किया गया।
महिलाओं की भागीदारी:
1,30,160 महिलाओं को 29,33,959 मानव दिवस का रोजगार मिला। इस श्रेणी में जिला तीसरे स्थान पर रहा।
मजदूरी भुगतान:
124.53 करोड़ रुपये से अधिक की मजदूरी सीधे ग्रामीणों के बैंक खातों में ट्रांसफर की गई। इस मामले में जिला प्रदेश में तीसरे स्थान पर रहा।
कलेक्टर का बयान:
कलेक्टर गोपाल वर्मा ने बताया कि ग्राम पंचायतों की मांग के अनुसार निर्माण कार्य स्वीकृत कर तेजी से शुरू किए गए, जिससे ग्रामीणों को निरंतर रोजगार मिल सका। वनांचल से लेकर मैदानी क्षेत्रों तक व्यापक स्तर पर कार्य संचालित हो रहे हैं।
उन्होंने बताया कि इस वित्तीय वर्ष में 11,466 परिवारों को 100 दिनों का रोजगार उपलब्ध कराया गया, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।

सीईओ की प्रतिक्रिया:
जिला पंचायत सीईओ अभिषेक अग्रवाल ने कहा कि ग्रामीणों की मांग के अनुसार रोजगार उपलब्ध कराना और समय पर कार्य स्वीकृति देना प्राथमिकता रही। जल संरक्षण और आजीविका से जुड़े कार्यों जैसे तालाब निर्माण, नाली निर्माण, कुक्कुट और पशुपालन शेड को बढ़ावा दिया गया है।
निष्कर्ष:
मनरेगा के प्रभावी क्रियान्वयन से कबीरधाम जिला लगातार प्रदेश में अग्रणी बना हुआ है। इससे न सिर्फ ग्रामीणों को रोजगार मिल रहा है, बल्कि गांवों में स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण भी हो रहा है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहा है।






