मनरेगा से बदलेगी जिंदगी: दिव्यांग अंधरू बैगा के लिए आजीविका डबरी बनी वरदान

कवर्धा | 10 फरवरी 2026
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराने के साथ-साथ स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण के जरिए आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इसी कड़ी में जनपद पंचायत पंडरिया के ग्राम पंचायत लोखान अंतर्गत ग्राम कमराखोल में विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा समुदाय के दिव्यांग हितग्राही श्री अंधरू बैगा के लिए निर्मित की जा रही आजीविका डबरी उनके सुनहरे भविष्य की नींव साबित हो रही है।
ग्राम सभा में मनरेगा के अंतर्गत कराए जाने वाले कार्यों की जानकारी देते हुए ग्रामीणों को आजीविका डबरी निर्माण के लिए प्रोत्साहित किया गया। इसके लाभ जानने के बाद श्री अंधरू बैगा ने स्वयं डबरी निर्माण की मांग की। वे पूर्व से मनरेगा जॉब कार्ड (CH02-004-113-002-113) के माध्यम से पंजीकृत हैं। ग्राम सभा के प्रस्ताव के अनुसार 1.05 लाख रुपये की लागत से डबरी स्वीकृत की गई।
वर्तमान में निर्माण कार्य प्रगति पर है और अब तक 574 मानव दिवस का रोजगार सृजित हुआ है। स्वयं श्री अंधरू बैगा को 36 दिवस का रोजगार प्राप्त हुआ है, जिसके एवज में उन्हें 9,360 रुपये मजदूरी का भुगतान छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक, कूकदूर शाखा से प्राप्त हुआ है।
निर्माणाधीन डबरी का आकार 20×20×3 मीटर है, जिसमें लगभग 894 घन मीटर जल भंडारण क्षमता होगी। इस डबरी से मछली पालन, बाड़ी एवं खेतों की सिंचाई के लिए जल उपलब्ध होगा। साथ ही भू-जल स्तर में वृद्धि से आसपास के क्षेत्र को भी लाभ मिलेगा।
मत्स्य पालन विभाग द्वारा विभागीय अभिसरण के तहत मछली बीज, दवाइयां, जाल एवं तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जल भराव होते ही मछली पालन का कार्य प्रारंभ किया जाएगा। इसके अतिरिक्त डबरी के मेड़ और आसपास की नमी वाले क्षेत्र में सब्जी उत्पादन भी किया जाएगा। उत्पादों की बिक्री के लिए निकटतम बाजार कुई उपलब्ध है।
🗣️ हितग्राही की बात:
श्री अंधरू बैगा का कहना है कि आजीविका डबरी बनने से उनकी आर्थिक स्थिति में बड़ा सुधार होगा। अब उन्हें रोजगार के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। मछली पालन की वर्षों पुरानी इच्छा पूरी होने जा रही है और सब्जी उत्पादन से अतिरिक्त आय भी होगी। उन्होंने बताया कि भविष्य अब सुखद और आत्मनिर्भर दिखाई दे रहा है।





