मनरेगा क्रियान्वयन में कबीरधाम जिला फिर बना प्रदेश में अग्रणी

दिव्यांगों, महिलाओं व परिवारों को रोजगार देने में प्रथम स्थान
कवर्धा | 15 जनवरी 2026
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के प्रभावी क्रियान्वयन में कबीरधाम जिला एक बार फिर प्रदेश में अग्रणी बना है। जिले ने दिव्यांगों, महिलाओं एवं पंजीकृत परिवारों को रोजगार देने के मामले में छत्तीसगढ़ में पहला स्थान हासिल किया है।
चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में जिले में अब तक 35 लाख 60 हजार मानव दिवस का रोजगार सृजित किया गया है, जिसके अंतर्गत 78 करोड़ 81 लाख रुपये की मजदूरी का भुगतान सीधे श्रमिकों के बैंक खातों में किया गया है। गांव में ही रोजगार मिलने से ग्रामीणों में खासा उत्साह देखा जा रहा है।
जिले के विकासखंड कवर्धा, बोडला, सहसपुर लोहारा एवं पंडरिया की लगभग सभी ग्राम पंचायतों में मनरेगा के अंतर्गत विभिन्न निर्माण कार्य संचालित हैं। प्रतिदिन औसतन 32 हजार से अधिक ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है।
मनरेगा में कबीरधाम की प्रमुख उपलब्धियां
1994 दिव्यांगों को रोजगार – प्रदेश में सर्वाधिक
1,00,597 महिलाओं को रोजगार – प्रदेश में प्रथम
1,01,405 पंजीकृत परिवारों को रोजगार – प्रदेश में प्रथम
35.60 लाख मानव दिवस रोजगार – प्रदेश में दूसरा स्थान
दैनिक रोजगार उपलब्धता – लगातार प्रदेश में दूसरा स्थान
427 ग्राम पंचायतों में चल रहे 3532 कार्य : कलेक्टर
कलेक्टर कबीरधाम श्री गोपाल वर्मा ने बताया कि जिले की 427 ग्राम पंचायतों में कुल 3532 निर्माण कार्य प्रगतिरत हैं। इनमें कच्ची नाली निर्माण, गाद निकासी, तालाब निर्माण व गहरीकरण, आजीविका डबरी, अमृत सरोवर, पशु शेड निर्माण जैसे कार्य शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि इन कार्यों से जहां ग्रामीणों को बड़े पैमाने पर रोजगार मिल रहा है, वहीं ग्रामीण अंचलों में आवश्यक अधोसंरचना का भी विकास हो रहा है। वर्तमान में लक्ष्य के विरुद्ध 55 प्रतिशत से अधिक मानव दिवस रोजगार सृजित किया जा चुका है।
3347 परिवारों को मिल चुका है 100 दिन का रोजगार
प्रभारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री विनय कुमार पोयाम ने बताया कि अब तक 3347 ग्रामीण परिवारों को 100 दिवस का रोजगार उपलब्ध कराया जा चुका है। मजदूरी भुगतान समय पर किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि आजीविका संवर्धन, जल संरक्षण एवं स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए आजीविका डबरी और पशु आश्रय शेड निर्माण को प्राथमिकता दी जा रही है।
मनरेगा के माध्यम से कबीरधाम जिला ग्रामीण रोजगार, सामाजिक समावेशन और ग्रामीण विकास का मजबूत उदाहरण बनकर उभर रहा है।

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