“सैया भये कोतवाल, अब डर काहे का… कबीरधाम में धान खरीदी बनी खुली लूट!”

3 केंद्रों से 4472 क्विंटल धान गायब, ₹1.06 करोड़ का घोटाला — किसानों के नाम पर सिस्टम ने किया खेल
कबीरधाम जिले में धान खरीदी व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। बघर्रा, बाघामुड़ा और रमतला उपार्जन केंद्रों में हुए भौतिक सत्यापन ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। रिकॉर्ड में खरीदी दिखाकर भुगतान भी कर दिया गया, लेकिन गोदाम में धान नदारद मिला।
करीब 4471.98 क्विंटल धान का हिसाब गड़बड़ मिला, जिसकी कीमत समर्थन मूल्य के आधार पर ₹1.06 करोड़ से ज्यादा आंकी गई है। जांच में सामने आया कि यह महज लापरवाही नहीं, बल्कि सुनियोजित भ्रष्टाचार है।
📍 केंद्रवार घोटाला:
बघर्रा:
कागजों में 1251 क्विंटल धान खरीदी, जमीन पर शून्य। करीब ₹29.64 लाख का फर्जी भुगतान।
बाघामुड़ा:
1929 क्विंटल धान गायब, ₹45.70 लाख का खेल उजागर।रमतला:
1291 क्विंटल धान का हिसाब नहीं, करीब ₹30.60 लाख का नुकसान।
⚠️ घोटाले का तरीका: ऑनलाइन पोर्टल में एंट्री, भुगतान भी पूरा — लेकिन गोदाम खाली।
कुछ जगहों पर तो धान का वजन बढ़ाने के लिए बोरो में पानी तक डाला गया, जिससे पूरे सिस्टम की पोल खुल गई।
👨🌾 किसानों के साथ सीधा धोखा: इस घोटाले का सबसे बड़ा नुकसान उन किसानों को हुआ, जो ईमानदारी से अपनी फसल बेचते हैं।
भुगतान में देरी, खरीदी में बाधा और फर्जीवाड़ा — ये सब अब आम हो गया है।
🚨 कार्रवाई के संकेत: जांच रिपोर्ट कलेक्टर को सौंप दी गई है।
खाद्य विभाग ने दोषियों के खिलाफ एफआईआर, विभागीय कार्रवाई, वसूली और ब्लैकलिस्टिंग की अनुशंसा की है।
🗣️ राजनीतिक वार: युवा कांग्रेस के प्रदेश सचिव आकाश केशरवानी ने मांग की है कि जिले के सभी 108 खरीदी केंद्रों की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। उनका आरोप है कि यह घोटाला और भी बड़ा हो सकता है।
💬 निष्कर्ष (तंज):
धान खरीदी का मकसद किसानों को राहत देना था, लेकिन यहां तो “सिस्टम” ही मालामाल हो रहा है…
अब सवाल यही—किसानों का हक आखिर जाएगा कहां?
कांग्रेसी कार्यकर्ता युवा कांग्रेस प्रदेश सचिव- आकाश केशरवानी





