आजीविका डबरी से बदली रामभजन के परिवार की तस्वीर, सब्जी उत्पादन से हर सप्ताह 800-900 रुपये की आमदनी
रोजगार के बाद सब्जी उत्पादन और मछली पालन बना आर्थिक उन्नति का जरिया, 50 डिसमिल भूमि का हो रहा बेहतर उपयोग
कवर्धा, ग्रामीण क्षेत्रों में सीमित आय और सिंचाई संसाधनों की कमी अक्सर परिवारों की आर्थिक प्रगति में बाधा बनती है। ऐसे में जल संरक्षण और आजीविका से जुड़ी परिसंपत्तियां ग्रामीण परिवारों के लिए आय के नए अवसर पैदा कर सकती हैं। जनपद पंचायत बोड़ला के ग्राम पंचायत पोड़ी निवासी रामभजन पिता लतेल के परिवार की कहानी इसका एक उदाहरण है।
विकसित भारत रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन ग्रामीण के अंतर्गत रामभजन की मांग पर 1.80 लाख रुपये की लागत से आजीविका डबरी का निर्माण कराया गया। डबरी बनने के बाद न केवल उन्हें रोजगार मिला, बल्कि सिंचाई का साधन उपलब्ध होने से सब्जी उत्पादन और मछली पालन जैसी गतिविधियों के जरिए अतिरिक्त आय का रास्ता भी खुला।

697 मानव दिवस रोजगार का हुआ सृजन
रामभजन के पास करीब 50 डिसमिल भूमि उपलब्ध थी, लेकिन सिंचाई का साधन नहीं होने के कारण इसका पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा था। आजीविका डबरी के निर्माण से उन्हें सिंचाई का स्थायी स्रोत मिला।
डबरी निर्माण कार्य में करीब 1 लाख 66 हजार रुपये का मजदूरी भुगतान हुआ और कुल 697 मानव दिवस रोजगार का सृजन हुआ। इससे रामभजन और उनके परिवार के साथ अन्य ग्रामीणों को भी रोजगार का अवसर मिला।
डबरी निर्माण से आसपास के करीब एक एकड़ क्षेत्र में सिंचाई सुविधा के विस्तार में मदद मिली। इसके साथ ही भू-जल स्तर बढ़ाने और हैंडपंप रिचार्ज में भी सहायता मिलने की बात बताई गई है।

डबरी ने खेती और मछली पालन के लिए खोले नए रास्ते
पहले वर्षा आधारित खेती और सीमित पानी के कारण रामभजन को कृषि से सालाना करीब 8 से 10 हजार रुपये तक ही आय हो पाती थी। सिंचाई की पर्याप्त सुविधा नहीं होने से वे अन्य व्यावसायिक गतिविधियां भी नहीं कर पाते थे।
आजीविका डबरी बनने के बाद 50 डिसमिल भूमि का उपयोग मत्स्य पालन के लिए किया जा रहा है। वहीं डबरी की मेड़ों और उपलब्ध सिंचाई सुविधा का उपयोग कर विभिन्न प्रकार की सब्जियों का उत्पादन भी किया जा रहा है।
वर्षभर पानी की उपलब्धता से कृषि और मत्स्य पालन दोनों गतिविधियों से अतिरिक्त आय की संभावनाएं बनी हैं।
सब्जी बेचकर हर सप्ताह 800 से 900 रुपये की आमदनी
रामभजन बताते हैं कि उनके खेत में बरबट्टी, टमाटर, लौकी, भिंडी, कद्दू, फूलगोभी, ग्वारफली, केला, कर्मत्ता भाजी और धनिया जैसी फसलें लगी हैं।
वे अपने घर से कुछ दूरी पर स्थित पोड़ी बाजार में सब्जियां बेचते हैं। उनके अनुसार, सब्जियों की बिक्री से हर सप्ताह करीब 800 से 900 रुपये की आमदनी हो रही है। इस तरह महीने में लगभग 3,500 से 4,000 रुपये तक की आय हो रही है।
रामभजन का कहना है कि पहले सिंचाई की सुविधा नहीं होने के कारण इस तरह सब्जी उत्पादन करना संभव नहीं था। अब बढ़ी हुई आमदनी से वे अपने परिवार की जरूरतों को पहले से बेहतर तरीके से पूरा कर पा रहे हैं।
मछली पालन से भी अतिरिक्त आय की उम्मीद
रामभजन ने आजीविका डबरी में मछली पालन भी शुरू किया है। उनके अनुसार, इससे प्रतिवर्ष करीब 60 से 70 हजार रुपये तक अतिरिक्त आय होने की उम्मीद है।
इस तरह एक ही परिसंपत्ति का उपयोग सिंचाई, सब्जी उत्पादन और मत्स्य पालन के लिए किया जा रहा है, जिससे परिवार के लिए आय के कई स्रोत विकसित हुए हैं।
जल संरक्षण से आजीविका संवर्धन की ओर बढ़ता गांव
रामभजन की कहानी ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण, कृषि विविधीकरण और आजीविका संवर्धन के बीच संबंध को सामने रखती है। आजीविका डबरी से रोजगार के साथ सिंचाई सुविधा मिली और उपलब्ध भूमि का बेहतर उपयोग संभव हुआ।
स्थानीय जरूरत के अनुसार तैयार की गई ऐसी परिसंपत्तियों से ग्रामीण परिवारों को कृषि के साथ अन्य आयमूलक गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इससे ग्रामीण स्तर पर रोजगार और आय के अवसर बढ़ाने तथा स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
रिपोर्ट — खिलेश्वर सिन्हा
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