एनएमसी ने दी मंजूरी, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा के प्रयासों को मिली सफलता, जिले में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगा नया आयाम

कबीरधाम को मिली शासकीय मेडिकल कॉलेज की सौगात, 2026-27 से 50 एमबीबीएस सीटों पर होगी पढ़ाई
एनएमसी ने दी मंजूरी, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा के प्रयासों को मिली सफलता, जिले में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगा नया आयामकवर्धा, 13 जुलाई। कबीरधाम जिले के लिए सोमवार का दिन ऐतिहासिक साबित हुआ। वर्षों से शासकीय मेडिकल कॉलेज की मांग अब पूरी होने जा रही है। नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) के मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड (एमएआरबी) ने शासकीय मेडिकल कॉलेज, कबीरधाम को शैक्षणिक सत्र 2026-27 से 50 एमबीबीएस सीटों के साथ संचालन की औपचारिक अनुमति प्रदान कर दी है। मेडिकल कॉलेज का संचालन पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति स्वास्थ्य विज्ञान एवं आयुष विश्वविद्यालय, रायपुर से संबद्ध रहेगा।

उप मुख्यमंत्री एवं कबीरधाम विधायक विजय शर्मा ने इसे जिले के विकास की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि मेडिकल कॉलेज की स्थापना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं और चिकित्सा शिक्षा के विस्तार के लिए लगातार कार्य कर रही है।
उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज शुरू होने से कबीरधाम सहित आसपास के जिलों के लाखों लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी। साथ ही जिले के विद्यार्थियों को अब एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए दूसरे शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा।
मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए जिला अस्पताल को 100 से बढ़ाकर 220 बिस्तरों का किया गया। लगभग 300 करोड़ रुपये की लागत से मेडिकल कॉलेज भवन निर्माण की स्वीकृति भी मिली। भूमि अधिग्रहण से लेकर निर्माण कार्यों की नियमित समीक्षा स्वयं उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा द्वारा की जाती रही।
23 जून को नई दिल्ली प्रवास के दौरान विजय शर्मा ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात कर इसी शैक्षणिक सत्र से मेडिकल कॉलेज शुरू कराने का आग्रह किया था। इसके बाद लगातार फॉलोअप और समन्वय के परिणामस्वरूप एनएमसी ने 50 एमबीबीएस सीटों के साथ संचालन की अनुमति जारी कर दी।

मेडिकल कॉलेज के शुरू होने से जिले में विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ेगी, आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार होगा और गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए मरीजों की बड़े शहरों पर निर्भरता कम होगी। यह उपलब्धि कबीरधाम के स्वास्थ्य, शिक्षा और समग्र विकास के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है।





