कवर्धा में सड़क चौड़ीकरण विवाद को लेकर हाईकोर्ट के आदेश पर उठे सवाल
आवेदक का दावा—आवेदन के निराकरण से पहले कार्रवाई की कोशिश, हाईकोर्ट ने 30 दिन में निर्णय का दिया था निर्देश
कवर्धा। कवर्धा शहर में जमीन से जुड़े एक मामले को लेकर नगर पालिका और प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं। मामले में आवेदक की ओर से अधिवक्ता सत्यम शिवम सुंदरम शुक्ला ने मुख्य नगर पालिका अधिकारी, नगर पालिका परिषद कवर्धा के समक्ष 29 सितंबर 2026 को रिमाइंडर आवेदन प्रस्तुत किया है। आवेदन में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के WPC No. 992/2026 में 24 मार्च 2026 को पारित आदेश का हवाला दिया गया है।
राजमहल चौक-समानापुर मार्ग के पास की भूमि का मामला
आवेदन में विवादित भूमि को कवर्धा शहर के राजमहल चौक से समनापुर मार्ग के पास स्थित बताया गया है। आवेदक के अनुसार शीट क्रमांक 10-बी, भूखंड क्रमांक 23/6 में 43.19 वर्गमीटर तथा भूखंड क्रमांक 24 में 5 वर्गमीटर, यानी कुल 48.19 वर्गमीटर भूमि उसकी स्वामित्वाधीन है।
आवेदन में पंजीकृत दानपत्र के आधार पर राजस्व रिकॉर्ड में नाम दर्ज होने का उल्लेख किया गया है। दस्तावेज के अनुसार 6 फरवरी 2024 को सामान्य खसरा में भी आवेदक का नाम दर्ज किए जाने का दावा किया गया है।
कार्रवाई से पहले आपत्ति दर्ज कराने का दावा
आवेदक का कहना है कि भूमि से संबंधित संभावित कार्रवाई को लेकर 13 जनवरी 2026 को संबंधित अधिकारियों के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किया गया था। इसमें प्रभावित पक्ष को उचित व्यवस्था, मुआवजा और भूमि अधिग्रहण संबंधी प्रक्रिया अपनाए जाने की मांग की गई थी।
आवेदन में यह भी कहा गया था कि किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ या निर्माण हटाने की कार्रवाई से पहले प्रभावित पक्ष को सूचना देते हुए सुनवाई का अवसर दिया जाए।
दस्तावेज में आवेदक की ओर से आरोप लगाया गया है कि आवेदन के निराकरण से पहले ही कार्रवाई की कोशिश की गई तथा मुख्य द्वार के पास करीब 7.5 फीट तक लाल निशान लगाए गए। इसी को लेकर प्रशासन के समक्ष आपत्ति दर्ज कराने की बात कही गई है।
हाईकोर्ट पहुंचा मामला
इसके बाद मामला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट पहुंचा। प्रस्तुत दस्तावेज के अनुसार मामले में कलेक्टर, राजस्व विभाग, पीडब्ल्यूडी और मुख्य नगर पालिका अधिकारी सहित संबंधित अधिकारियों को पक्षकार बनाया गया था।
24 मार्च 2026 को हाईकोर्ट द्वारा मामले की सुनवाई की गई। आवेदक द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज के अनुसार न्यायालय ने मुख्य नगर पालिका अधिकारी को 13 जनवरी 2026 को प्रस्तुत आवेदन का निराकरण आदेश प्राप्त होने के 30 दिनों के भीतर करने का निर्देश दिया था।
आवेदक ने फिर लगाया आवेदन लंबित होने का आरोप
आवेदक का दावा है कि हाईकोर्ट के उक्त निर्देश के बावजूद 13 जनवरी 2026 को प्रस्तुत आवेदन का अभी तक निराकरण नहीं किया गया है। इसी आधार पर 29 सितंबर 2026 को मुख्य नगर पालिका अधिकारी, नगर पालिका परिषद कवर्धा के समक्ष रिमाइंडर आवेदन प्रस्तुत किया गया है।
रिमाइंडर में हाईकोर्ट के आदेश का पालन करते हुए लंबित आवेदन का शीघ्र निराकरण करने की मांग की गई है।
अब प्रशासन के निर्णय पर नजर
मामले में आवेदक की ओर से अपनी भूमि और राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज अधिकार का हवाला दिया जा रहा है। वहीं, सड़क चौड़ीकरण और संबंधित भूमि को लेकर कार्रवाई तथा सीमांकन का विवाद सामने आया है।
अब मुख्य नगर पालिका अधिकारी द्वारा हाईकोर्ट के निर्देश के तहत आवेदक के आवेदन पर क्या निर्णय लिया जाता है, इस पर नजर रहेगी।
नोट: इस खबर में लगाए गए आरोप और दावे आवेदक द्वारा प्रस्तुत आवेदन एवं दस्तावेजों पर आधारित हैं। संबंधित नगर पालिका अथवा प्रशासन का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी खबर में प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
रिपोर्ट — खिलेश्वर सिन्हा
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